January 29, 2026

पेंशनर सेवाओं के डिजिटलीकरण पर वित्त मंत्री की पहल

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पेंशनर सेवाओं के डिजिटलीकरण पर वित्त मंत्री की पहल

पेंशनर सेवाओं के डिजिटलीकरण पर वित्त मंत्री की पहल

चंडीगढ़, 24 दिसंबर। पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने राज्य के पेंशनरों की पेंशनर सेवा पोर्टल पर 100 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन को तेज करने के उद्देश्य से आज यहां पेंशन वितरित करने वाले बैंकों के साथ एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और प्रत्येक बैंक के केस लोड के अनुसार इस कार्य को पूरा करने के लिए समय-सीमाएं जारी कीं। वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह डिजिटल परिवर्तन मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक प्रमुख प्राथमिकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पंजाब सरकार के पेंशनर सरकारी कार्यालयों में जाए बिना अपने घरों से ही आवश्यक सेवाओं तक पहुंच कर सकें।

इस व्यापक प्रगति समीक्षा के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पोर्टल की शुरुआत और उसके बाद जिला स्तर के ‘सेवा मेलों’ के बाद 1,11,233 पेंशनर पहले ही अपना ई-केवाईसी सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं और इस गति को और तेज करने की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी पेंशनर इस सेवा के लिए रजिस्टर हो सकें। उन्होंने बैंक अधिकारियों को सेवानिवृत्त पेंशनरों की सहायता के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए, विशेष रूप से ब्रांच मैनेजरों को उन बुजुर्ग पेंशनरों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए जो डिजिटल इंटरफेस से परिचित नहीं हैं। वित्त मंत्री ने चेतावनी दी कि बैंक स्तर पर कोई भी लापरवाही या तकनीकी बाधा जो इस रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में रुकावट डालती है, उसके खिलाफ सख्त जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

इस संबंध में चिंताओं को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने आश्वासन दिया कि इस अनिवार्य रजिस्ट्रेशन चरण के दौरान पेंशन वितरण बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। वित्त मंत्री ने बैठक के समापन पर इस योजना में शामिल सभी भागीदारों से पंजाब को डिजिटल कल्याण सेवाओं में एक अग्रणी बनाने के लिए मिशन-मोड भावना से काम करने की अपील की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रदेश के 3.15 लाख पेंशनरों को यह सुविधा बिना किसी रुकावट या कठिनाई के प्रदान की जा सके।

बैठक में अन्य लोगों के अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त आलोक शेखर, निदेशक खजाना अरविंद के. एम. के. और अतिरिक्त निदेशक खजाना सिमरजीत कौर उपस्थित थे।

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